मथुरा: चंदन की लकड़ी से निर्मित रथ में विराजमान होकर भगवान रंगनाथ ने दिए भक्तों को दर्शन

तीर्थ नगरी वृंदावन में भारत के दक्षिण संस्कृति पर आधारित रंगनाथ मंदिर में चल रहे दस दिवसीय ब्रह्म महोत्सव किया जा रहा है। जिसमें भगवान रंगनाथ विभिन्न तरह की झांकियों में निकल कर भक्तों को दर्शन देते हैं।

ब्रह्म महोत्सव के दौरान रथ मेला का आयोजन किया जाता है जोकि बेहद प्रसिद्ध मेला है यहां हजारों की तादाद में श्रद्धालु भगवान रंगनाथ के रथ में विराज कर दर्शन करने के लिए आते हैं. आज रथ मेले का आयोजन किया गया जिसमें प्रात काल के समय मंदिर के सेवायत द्वारा रथ का पूजन किया गया और भगवान रंगनाथ को मंत्रोच्चारण के मध्य रथ में विराजमान कराया गया है।

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60 फीट ऊंचे 12 फीट चौड़ा चंदन की लकड़ी से बने रथ को भक्तों द्वारा आस्था की डोर (rope) से खींचा जाता है जिससे भगवान नगर भ्रमण करते हैं रथ के आगे बैंड बाजों के साथ भजन करते हुए भक्त आगे आगे चलते हैं।

यह रथ रंगनाथ मंदिर से प्रारंभ होकर चुंगी चौराहा होते हुए बड़े बगीचा पहुंचते हैं और लगभग दोपहर के समय भक्तों द्वारा रथ को बड़े बगीचे से आस्था की डोर (rope )से खींचकर रंगनाथ मंदिर पर जाकर समाप्त किया जाता है साथ ही यह मेला लगभग 170 वर्ष पुराना मन जाता है।

तीर्थ नगरी वृंदावन में भारत के दक्षिण संस्कृति पर आधारित रंगनाथ मंदिर में चल रहे दस दिवसीय ब्रह्म महोत्सव किया जा रहा है। जिसमें भगवान रंगनाथ विभिन्न तरह की झांकियों में निकल कर भक्तों को दर्शन देते हैं।

ब्रह्म महोत्सव के दौरान रथ मेला का आयोजन किया जाता है जोकि बेहद प्रसिद्ध मेला है यहां हजारों की तादाद में श्रद्धालु भगवान रंगनाथ के रथ में विराज कर दर्शन करने के लिए आते हैं. आज रथ मेले का आयोजन किया गया जिसमें प्रात काल के समय मंदिर के सेवायत द्वारा रथ का पूजन किया गया और भगवान रंगनाथ को मंत्रोच्चारण के मध्य रथ में विराजमान कराया गया है।

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यह रथ रंगनाथ मंदिर से प्रारंभ होकर चुंगी चौराहा होते हुए बड़े बगीचा पहुंचते हैं और लगभग दोपहर के समय भक्तों द्वारा रथ को बड़े बगीचे से आस्था की डोर (rope )से खींचकर रंगनाथ मंदिर पर जाकर समाप्त किया जाता है साथ ही यह मेला लगभग 170 वर्ष पुराना मन जाता है।

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ब्रह्म महोत्सव के दौरान रथ मेला का आयोजन किया जाता है जोकि बेहद प्रसिद्ध मेला है यहां हजारों की तादाद में श्रद्धालु भगवान रंगनाथ के रथ में विराज कर दर्शन करने के लिए आते हैं. आज रथ मेले का आयोजन किया गया जिसमें प्रात काल के समय मंदिर के सेवायत द्वारा रथ का पूजन किया गया और भगवान रंगनाथ को मंत्रोच्चारण के मध्य रथ में विराजमान कराया गया है।

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यह रथ रंगनाथ मंदिर से प्रारंभ होकर चुंगी चौराहा होते हुए बड़े बगीचा पहुंचते हैं और लगभग दोपहर के समय भक्तों द्वारा रथ को बड़े बगीचे से आस्था की डोर (rope )से खींचकर रंगनाथ मंदिर पर जाकर समाप्त किया जाता है साथ ही यह मेला लगभग 170 वर्ष पुराना मन जाता है।

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