‘पहली सालगिरह’

"आज लेट मत करना यार हर रोज की तरह, जल्दी आना घर" सिया ने मुझे कॉल कर ऑफिस से घर जल्दी आने की एक रिक्वेस्ट की। ऑफिस के काम में उससे हर रोज वायदा करता था लेकिन आ नहीं पाता था।

“आज लेट मत करना यार हर रोज की तरह, जल्दी आना घर” सिया ने मुझे कॉल कर ऑफिस से घर जल्दी आने की एक रिक्वेस्ट की। ऑफिस के काम में उससे हर रोज वायदा करता था लेकिन आ नहीं पाता था। टास्क ही टास्क…। आज हमारी पहली एनिवर्सरी है। घर में प्रोग्राम है और सिया प्रेगनेंट भी। उसे मेरी बहुत जरूरत है लेकिन मैं कहाँ दे पाता हूँ उसे बहुत ज्यादा समय, जितना एक पति को पत्नी के प्रेग्नेंसी के समय देना चाहिए।

“ओक बीवी, आज पक्का घर जल्दी आ जाऊंगा। बॉस को मैंने बोल दिया है, तुम अपना ख़्याल रखना। मम्मी जी बस पहुँचती ही होंगी ” मैंने फ़ोन से हर रोज़ की तरह 100 प्रतिशत वाला वादा किया।

” देखा…., तुम्हें कुछ नहीं पता, मम्मी जी आ गई हैं। यहां तक कि दीदी मम्मी बुआ भाभी सब लोग आ गए हैं। बस तुम हो कि हमेशा काम-काम। जल्दी आओ यार, आज दर्द भी बहुत हो रहा है। इसे भी आज ही बाहर आना है क्या ” प्यार भरी मुस्कान ने मुझे खुशी तो दी लेकिन चिंतित कर दिया।

मैं अगले एक घण्टे में बॉस को बोलकर कंपनी से घर की तरफ निकला, आज मुझे बेवी बाली खुशी ने शायद लापरवाह सा कर दिया। मुझे बस घर जल्दी जाने की पड़ी थी। मैंने गाड़ी उठाई और न जाने क्यों स्पीड से बिल्डिंग की पार्किंग से बाहर निकला ही था कि अचानक सामने से करीब 21 साल की एक लड़की स्कूटी से आ गई और मेरा उसके साथ एक्सीडेंट हो गया।

मैं हड़बड़ाहट में गाड़ी से उतरा और जब सामने जाकर देखा तो वो लड़की नीचे पड़ी थी और उसके माथे पर हल्की चोट थी जहां से ब्लड निकल रहा था। मैं जल्दी से उसे पास के एक हॉस्पिटल में ले गया। जहां उसे 3 घण्टे के लिए एडमिट किया गया। लड़की ने उसके घर फ़ोन न करने की इसलिए रिक्वेस्ट की क्योंकि वो नॉर्मल चोट होने की बजह से घर बालों को परेशान करना नहीं चाहती थी। और इस कारण मुझे वहां 3 घण्टे रुकना पड़ा।

लेकिन इस आपाधापी में मैं अपना फोन नीचे गाड़ी में ही भूल गया और शायद याद करूँ कि कॉल करके बता दूं सभी को घर में यह सोच ही नहीं पाया। लड़की की ड्रेसिंग होने के बाद जब कुछ देर रेस्ट होने के लिए नॉर्मल एडमिट के तौर पर रोका गया तब मैं उसके पास ही बैठ उसकी लाइफ के बारे में बातचीत करने लगा। शायद यह मेरा माफ़ीनामा जैसा ही था।

” सॉरी यार, मैं थोड़ा जल्दी में था….,और आपने भी कोई इंडिकेशन नहीं दिया तो, सॉरी, बहुत चोट आ गई मेरी बजह से” बेड के पास स्टूल पर बैठकर सर नीचे झुका एक दूसरे हाँथ की उंगलियों को तोड़ मरोड़ कर धीमी आवाज़ में बोला।

“अच्छा जी, कितना बड़ा एक्सीडेंट कर दिया और सॉरी बोलकर पल्ला झाड़ रहे हो। बड़े बदमाश टाइप के लगते हो जी “मैं सर नीचे झुकाये था, जब उसकी मुस्कराहट के साथ ये लफ्ज सुने मेरी नजर सीधे उसकी आँखों से मिलाने की हिम्मत हो गई। “आप मुस्करा रहे हैं, यानि कि माफ कर दिया। हाय, मैं संदीप” जैसे ही मैंने उसकी तरफ दोस्ती जैसा हाँथ बढ़ाया वो तेजी से हंसने लगी।

” संदीप जी, एक्चुअली हम एक्सीडेंट से मिले हैं। आप किसी को चोट मारकर दोस्ती करने के हुनरबाज हैं क्या ?, इतनी जल्दी दोस्ती नहीं करती मैं। फ़िलहाल मैं श्रद्धा शुक्ला। बैंक मैनेजर हूँ इसी शहर में। वैसे तो मेरी शादी फिक्स हो चुकी है लेकिन फिर भी दोस्ती के बारे में सोच सकती हूं। अब एक्सीडेंट हो गया है, टूट फ़ूट गई हूँ, तो शादी कहीं टूट गई तो आपसे दोस्ती करने का फायदा हो सकता है इसलिए।”

” बड़ी दिलचस्प हैं आप, कितनी चोट मार दी मैंने आपको और आप हैं कि एक पल के लिए मुझसे नाराज नहीं हुईं ?” ” अगर मैं कहूँ कि हो सकता था मैं इस एक्सीडेंट में मर जाती, लेकिन आप थे इसलिए शायद बच गई, तो।  मैं पॉजिटिव सोचती हूँ, और वैसे भी भला कोई जबर्दस्ती एक्सीडेंट करता है क्या ? ख़ैर, आपने अपना परिचय नहीं दिया ? ”

” मैं साफ़्टवेयर इंजीनियर हूँ, उसी बिल्डिंग में samsung कंपनी में काम करता हूँ। शादीशुदा हूँ, और आज मेरी पहली एनिवर्सरी है। बीवी प्रेग्नेंट है और मैं उसी जल्दी में घर जाने के चक्कर में यह सब में फंस गया ”

” ओह wao! सॉरी, आपको बताना चाहिए था यार। जाइये आप। घर वाले आपका इंतज़ार कर रहे होंगे। क्या यार, जाओ मैं ख़ुद डिस्चार्ज होकर चली जाउंगी। आपकी बिल्डिंग में ही जॉब करती हूँ मैं। कल मिल लेंगे ओक। अब जाओ यार, हैप्पी एनिवर्सरी ” मेरी तरफ हाँथ फ़ैलाकर गले लगने का जब इशारा किया उस खूबसूरत लड़की ने, मैं ख़ुदको न जाने क्यों नहीं रोक पाया। और मैंने जैसे ही उसे गले लगाया उसने मेरे माथे पर किस करने के बाद फिर से बधाई दी।

मैं मुस्कराकर उसे बाए कहकर बाहर तो निकल आया घर जाने के लिए, लेकिन मेरे दिमाग़ में दो बातें आने लगीं। एक बीवी के लिए बफ़ादारी और दूसरी बाहर की यह खूबसूरत लड़की से दोस्ती कर लेने की एक खूबसूरत रंगीन नियत। र,अब मुझे बस फिर घर जल्दी जाने की जिद हुई। रास्ते से मैंने एक गले का क़ीमती हार लिया जो पिछले सप्ताह बुक कराकर गया था। यह मेरी बीवी के लिए एनिवर्सरी गिफ्ट था। लेकिन डर था दिल में कि आज तो हमेशा से और लेट हो गया हूँ। क्या कहूँगा मेरी अपनी पत्नी से, जिसे इस प्रेग्नेंसी में मेरी कितनी जरूरत है।

मैं जैसे ही घर पहुंचा, सभी मेरे इंतजार में थे। मैंने अभी तक फ़ोन नहीं देखा था। क्योंकि डर रहा था कि फ़ोन में न जाने कितनी कॉल पड़ी होंगी, उनका जबाब क्या दूंगा ? मेहमान लॉबी में रखे केक के आसपास बैठे थे। मेरी प्यारी बीवी मेहरूम लहँगे में एक खूबसूरत दुल्हन के जोड़े में मेरे लिए सजी तो खड़ी थी, लेकिन शायद बहुत नाराज़।

” कोई चिंता नहीं है मेरी आपको। अभी से यह हाल है आपका। आगे क्या करोगे संदीप तुम। देखिए फ़ोन, मेरी और पापा की कितनी कॉल पड़ी हैं। जानती हूँ अब ज़बाब में बहाने मिलेंगे। आज के बाद मैं कभी तुमसे कुछ नहीं कहूंगी, मेरे होने बाले बच्चे की कसम ” शायद गुस्सा करने की कोशिश करती हुई बहुत उलझी हुई थी कुछ सबालों में। हो भी क्यों नहीं, आख़िर मैं जो इतना लापरबाह हूँ अपनी पत्नी के लिए। उसकी कभी तो बात मान लूँ, मानता तो हूँ पर समय साथ नहीं देता। यह कैसे समझाऊँ….

” सॉरी यार, अब क्या बताऊँ, माफ करदो, बस इतना ही कह सकता हूँ यार कि मैं बहुत प्यार करता हूँ तुमसे, काश मैं तुम्हें समझा पाता, मेरी वजह से आपकी आंखों में आँशु आये बहुत बुरा फील हुआ यार ” मैंने बाहर गेट पर लगे बासर में हाँथ धुलने के बाद लॉबी में खड़ी सिया के पास जाकर मनाने की कोशिश की। शादी के बाद पहली बार अनजाने में आज बो शायद इतनी हर्ट हुई कि सभी के सामने वो आँशु न रोक पाई। ” मुझे कुछ नहीं सुनना, बस केक काटो, और आज के बाद कुछ कहना भी नहीं। मैं बस पत्नी हूँ यह समझकर रहूँगी ”

” आई लव यू सिया, देखो क्या लाया हूं आपके लिए, बस इसकी बजह से लेट हो गया थोड़ा। ऑर्डर दिया था लेकिन लेट गया तो रुकना पड़ा। अब इसके बिना भी तो नहीं आ सकता था न ” जैसे ही मैंने सिया के सामने हार निकाल कर रखा, मेहमानों ने तालियां बजा हमारे प्यार की तारीफ़ की। मम्मी जी ने जैसे ही समझाया… सिया ने मुझे गले लगा लिया

“आई लव यू संदीप, माफ़ करदो यार “, सिया की बाहों में जाकर मैं खुदके सामने बहुत शर्मिंदा हो रहा था। एक झूठ ने हमारे बीच ग़लतफ़हमी बनने से तो रोक ली, लेकिन हकीकत ने मुझे बहुत परेशान किया।

कितना प्यार करती है सिया मुझसे, कभी कुछ नहीं मांगती मुझसे मेरे समय के अलावा। लेकिन आज मैंने सभी के सामने उसकी शायद आशाओं पर जो पानी फेरा, उस गलती ने मुझे बहुत बुरा साबित किया। न जाने क्यों पैसों की कीमत से हमारे प्यार की खुशियां बांधने की कोशिश तो की मैंने, लेकिन उसके दिल में मेरी मेहनत की बजह से और प्यार बढ़ गया।

उस दिन के बाद मैंने कसम खा ली, अपनी जॉब के लिए मैं अपनी फैमिली को दरकिनार नहीं कर सकता। मुझसे बहुत प्यार करती है सिया, और मैं उसके प्यार को झूठ और तोहफ़े की कीमत से बाँधना नहीं चाहता। उस दिन के बाद हम दोनों कभी एक दूसरे से नाराज़ नहीं हुए। हमारा एक साल का बच्चा है और हम तीनों एक बेहतरीन परिवार के सफ़र में जीवन व्यतीत कर रहे हैं।

संदीप यादव उपन्यासकार
संदीप यादव उपन्यासकार

‘संदीप यादव उपन्यासकार’

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