दुखद : इतिहासकार पद्मश्री योगेश प्रवीण का निधन

लखनऊ । वही रूप की धूप
वही रंग-ओ-रोशनी
वही दोस्ती की खुशबू
मोहब्बत की मोरनी
वही ठुमरी, कथक और तिहाई की चोट
सितारों भरे आंचल, कटारी की गोट
चिकन के करिश्मे सजाए बदन
जरीदार जलवे, जवां अंजूमन
अपने दिल-ए-नाशाद को आ शाद करें हम
आओ के लखनऊ को जरा याद करें हम…..

ये भी पढें-अमेठी : 24 घंटों बाद भी नहीं हुआ अंतिम संस्कार, जानिए क्या है कारण…

इतिहासकार पद्मश्री योगेश प्रवीण लखनऊ का सोमवार को निधन हो गया है। बता दें, उनकी एंबुलेंस रकाबगंज चौराहे पर दो घंटे तक जाम में फंसी रही। जाम की वजह से समय पर अस्पताल न पहुंच पाने से उनकी जान चली गई। उनके घर में परिजनों का बुरा हाल है।

बता दें, अवध और लखनऊ का इतिहास खंगालती कई महत्वपूर्ण किताबों के लिए उन्हें कई पुरस्कार व सम्मान भी मिल चुके हैं। उनकी अब तक 30 से अधिक किताबें प्रकाशित हो चुकी हैं, जो अवध की संस्कृति और लखनऊ की सांस्कृतिक विरासत पर आधारित हैं।

रामकथा महाकाव्य अपराजिता, उर्दू में कृष्ण पर आधारित विरह बांसुरी के अलावा दास्ताने अवध, ताजेदार अवध, गुलिस्ताने अवध, लखनऊ मॉन्युमेंट्स, लक्ष्मणपुर की आत्मकथा, हिस्ट्री ऑफ लखनऊ कैंट, पत्थर के स्वप्न, अंक विलास, लखनऊनामा, दास्ताने लखनऊ, लखनऊ के मोहल्ले और उन की शान, किताबों के माध्यम से गुजरे लखनऊ के नजारों से रूबरू किताबें खासी चर्चित हैं।

Related Articles

Back to top button