साइकिल से खाना डिलीवर करने पहुँचा व्यक्ति -कौन था जिसको लोगो ने दिला दी बाइक ?

पिछले कई दिनों से गर्मी पड़ रही है। कई शहरों में तापमान 40 डिग्री से ऊपर है। ऐसे में एक फूड डिलीवरी ब्वॉय की करतूत सोशल मीडिया पर वायरल हो गई है. राजस्थान की गर्मियों में साइकिल से समय पर कोल्डड्रिंक पहुंचाई। ऑर्डर देने वाला का दिल पसीज गया। क्राउडफंडिंग शुरू हुई। मतलब भीड़ की मदद से पैसा जुटाना।

मामला क्या है?

मामला राजस्थान के भीलवाडा जिले का है दोपहर के वक्त आदित्य ने ऑनलाइन फूड डिलीवर एप जोमैटो से एक कोल्डड्रिंक ऑडर की. डिलीवरी बॉय ने सोचा कहीं बेहिसाब गर्मी में कोल्ड ड्रिंक गर्म न हो जाए, इसलिए डिलीवरी बॉय ने तेजी से साइकिल चलाकर कस्टमर को टाइम पर ऑडर डिलीवर कर दिया। जब आदित्य ने देखा कि टाइम पर डिलीवरी देने वाला जोमैटो बॉय साइकिल पर आया है, उसने इसकी मदद करने की सोची. आदित्य ने बताया कि इस डिलीवरी बॉय का नाम दुर्गा शंकर मीणा है।

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डिलीवरी करने वाले की कहानी क्या है?

डिलीवरी बॉय का नाम दुर्गा शंकर मीणा. आदित्य को दुर्गा शंकर मीणा ने बताया कि वह बी. कॉम तक पढ़े हैं और 12 सालों तक एक प्राइवेट स्कूल में इंग्लिश के टीचर थे। लेकिन कोरोना के कारण वे बेरोजगार हो गए। घर खर्च चलाने के लिए और बच्चो को पालने के लिए उन्हें जोमैटो में डिलीवरी बॉय की नौकरी करनी शुरू कर दी. महीने भर में वे 10 हजार तक कमा लेते हैं। पिछले 4 महीनों से वे ये काम कर रहे हैं. डिलीवरी के साथ-साथ ही वे बच्चों को ऑनलाइन ट्यूशन भी देते हैं। इसके लिए उन्होंने बैंक से लोन लेकर एक लैपटॉप भी खरीदा है।अपनी सैलरी से ही दुर्गा शंकर मीणा लोन की किश्त भी भरते हैं। दुर्गा ने आगे बताया कि वे हर महीने कुछ पैसे भी बचाते हैं ताकि एक बाइक खरीद सकें।

आदित्य ने दुर्गा शंकर मीणा की मदद करने के लिए क्राउडफ़ंडिंग का सहारा लिया। ट्विटर पर दुर्गा शंकर मीणा की यूपीआई आइडी शेयर की, ताकि पैसा सीधा दुर्गा शंकर मीणा के अकाउंट में ट्रांसफर हो। लोगों ने मदद करना शुरू किया। आदित्य बताते हैं कि उन्होंने टारगेट तो सिर्फ 75 हजार का रखा था। लेकिन लोगों ने दुर्गा शंकर मीणा की मदद करने में ऐसी रुचि दिखाई कि लगभग तीन घंटों में ही करीब डेढ़ लाख रुपए इकट्ठा हो गए. इस दौरान कपिल मुकुंद बोरवानी नाम के एक व्यक्ति ने चंदे में 10 हजार रुपए भेजे दी हैं। जो कि सबसे अधिक है आदित्य ने बताया कि कई लोगों ने विदेशों से भी मदद करने की कोशिश की लेकिन उनके पास इसके लिए संसाधन मौजूद नहीं थे।

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